केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान Hindi History Of Word

 

Hindi History Of Word

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (पूर्व में "भरतपुर पक्षी अभयारण्य") का नाम एक धार्मिक और Hindi History Of Word ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसका नाम "केवलादेव" है, जो यहां स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर के नाम पर पड़ा है।

"केवलादेव" शब्द का इतिहास:

  1. "केवलादेव" नाम का उत्पत्ति:

    • "केवलादेव" नाम दो भागों से मिलकर बना है – "केवला" और "देव"। "केवला" का अर्थ है शिव, और "देव" का अर्थ है ईश्वर। इसलिए "केवलादेव" का अर्थ हुआ शिव भगवान या ईश्वर के रूप में शिव

    • इस नाम के साथ जुड़ा हुआ है एक प्राचीन केवलादेव शिव मंदिर, जो इस उद्यान के भीतर स्थित है। यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए एक धार्मिक स्थल है और इसके कारण ही इस क्षेत्र को "केवलादेव" के नाम से जाना जाता है।

  2. धार्मिक महत्त्व:

    • केवलादेव English History Of Word मंदिर का धार्मिक महत्त्व बहुत अधिक है। यह मंदिर शिवजी को समर्पित है और यहां पर हर साल अनेक भक्त आते हैं। मंदिर और इसके आसपास का क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, जिससे उद्यान को भी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक अलग पहचान मिली।

इतिहास और विकास:

  1. राजसी शिकारगाह:

    • इस क्षेत्र का ऐतिहासिक उपयोग 19वीं शताब्दी में हुआ था, जब भरतपुर के महाराजाओं ने इस क्षेत्र को शिकारगाह के रूप में विकसित किया था। महाराजा सवाई माधो सिंह ने यहां एक कृत्रिम झील का निर्माण किया, ताकि जलपक्षियों को आकर्षित किया जा सके और शिकार के लिए उनका उपयोग किया जा सके।

  2. पक्षी अभयारण्य के रूप में संरक्षण:

    • यह क्षेत्र शिकार Marathi History Of Word के उद्देश्य से शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे इसे पक्षी संरक्षण के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया। 1956 में इसे एक पक्षी अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया और 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया।

  3. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल:

    • 1985 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया, क्योंकि यह स्थान जैविक विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के रूप में जाना जाता है, और यह अब पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक प्रसिद्ध गंतव्य बन चुका है।

निष्कर्ष:

"केवलादेव" शब्द और नाम इस क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और जैविक महत्त्व को दर्शाता है। यह एक ऐसा स्थल है, जहाँ प्राचीन धार्मिक परंपराएँ, जैविक विविधता, और संरक्षण की कोशिशों का मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलता है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आज न केवल पक्षियों के लिए, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अनमोल धरोहर बन चुका है।

Comments

Popular posts from this blog

Gateway of India English History Of Word

Malkikarjuna Temple English History Of Word

Shirdi Sai Baba Temple English History Of Word