अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून Hindi History Of Word
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"अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून" एक शब्द है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों और युद्ध नीति के क्षेत्र में लागू होने वाले कानूनों को संदर्भित करता है। इसका उद्दीपन ज्यादातर Hindi History Of Word संघर्ष और युद्ध के संदर्भ में विभिन्न आपत्तियों के बारे में होता है जिसमें लोगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा का प्रयास किया जाता है।
"अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून" का इतिहास बहुत दिनों से है, और इसकी मूल शक्ति युद्ध समय में मानव दुखों को कम करने और युद्धों के प्रभावों को सीमित करने का प्रयास करने में है। इसकी शुरुआत को आमतौर पर जिनीवा और हेग की समझौता के संदर्भ में की जाती है।
मुख्य घटनाएं और संविधान:
- प्रथम जिनीवा समझौता (1864): यह समझौता पहली बार 1864 में हुआ था और इसने युद्ध में घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल के लिए मौद्रिक निर्धारित किया।
- हेग के समझौते (1899 और 1907): हेग के समझौतों ने युद्ध के साधन और विधानों के बारे में मानवीय निर्धारण करने का प्रयास किया। इसमें युद्ध के प्रभाव को सीमित करने, कैदियों की देखभाल करने, और आपत्कालीन युद्ध की अवहेलना से बचाव के लिए निर्देश होता है।
- जिनीवा समझौते (1949): 1949 के चार जिनीवा समझौते ने पहले से मौजूद समझौते को बढ़ावा और अद्यतित किया। इसमें युद्ध में घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल, समुद्र में घायल, बीमार और डूबे हुए सैनिकों की देखभाल, युद्ध कैदियों की देखभाल, Hindi History Of Word और युद्ध के समय नागरिकों की सुरक्षा के बारे में निर्देश है।
- अतिरिक्त समझौते (1977): 1977 के जिनीवा समझौते ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के निर्देशों को मजबूत किया और इसमें नए निर्देशों को शामिल किया जिसमें युद्ध की प्रवृत्तियों के बारे में निर्देश होता है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून आज भी नए चुनौतियों और युद्धों में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का सामना करने के लिए विकसित हो रहा है। नागरिकों की सुरक्षा, कुछ युद्धों के निषेध और युद्ध अपराधों की जाँच और दोषी ठहराने की जिम्मेदारी इस क्षेत्र में जारी हैं।
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